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पाकिस्तान की राजनीति में ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को एक ‘टाइटन’ की संज्ञा दी जाती है. अपने ज़माने में उनकी गिन्ती दुनिया के सबसे बुद्धिमान और पढ़े लिखे नेताओं में होती थी. 1977 में एक सैनिक विद्रोह में जनरल ज़िया उल हक़ ने उनका तख़्ता पलट दिया और दो साल बाद एक विवादास्पद मुक़दमें के बाद उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया. ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की 90 वी जयंती पर उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को याद कर रहे हैं हैं रेहान फ़ज़ल विवेचना में